बच्चों में तेजी से बढ़ता टाइफाइड का खतरा, जानें कैसे रखें सुरक्षित!
मानसून में बच्चों में टाइफाइड का खतरा तेजी से बढ़ता है। जानिए इस संक्रमण के कारण, लक्षण, रोकथाम और इलाज के उपाय गाजियाबाद के विशेषज्ञ की सलाह के साथ।
बच्चों में तेजी से बढ़ता टाइफाइड का खतरा, जानें कैसे रखें सुरक्षित!
  • Category: सामान्य ज्ञान

टाइफाइड एक संक्रामक बीमारी है जो बच्चों में सबसे अधिक पाई जाती है, खासकर मानसून के मौसम में जब नमी और गंदगी से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं।


यह संक्रमण Salmonella Typhi नाम के बैक्टीरिया से होता है जो दूषित पानी, अस्वच्छ खाना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बच्चों के शरीर में प्रवेश करता है।


भारत में हर साल लाखों बच्चे इस बीमारी की चपेट में आते हैं और सबसे ज्यादा मामले पांच से पंद्रह वर्ष की उम्र के बच्चों में देखे जाते हैं।


डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बड़ों की तुलना में काफी कमजोर होती है। यही वजह है कि वह जल्दी संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। छोटे बच्चे अक्सर न तो हाथ धोते हैं और न ही सफाई का ध्यान रखते हैं।


नाखून चबाना, खुले में बिकने वाला खाना खाना, कहीं से भी पानी पी लेना और गंदे हाथों से खाना खाना जैसी आदतें उन्हें टाइफाइड की ओर धकेल देती हैं।


मानसून क्यों बनाता है बच्चों को बीमार?


मानसून के मौसम में जलभराव, गंदे पानी का खुले में बहना और नमी जैसी स्थितियां बैक्टीरिया के विकास के लिए अनुकूल होती हैं।


गाजियाबाद के जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ विपिनचंद्र उपाध्याय बताते हैं कि बरसात के दौरान जब नालियां ओवरफ्लो होती हैं या पीने के पानी की सप्लाई में सीवर का पानी मिल जाता है, तब पानी का संक्रमण बढ़ता है।


साथ ही खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ जैसे कटे हुए फल, चाट, गोलगप्पे, कुल्फी और जूस भी इस मौसम में जोखिम भरे हो जाते हैं।


इन खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाला पानी साफ नहीं होता और बच्चे जब इन चीजों का सेवन करते हैं, तो बैक्टीरिया आसानी से उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।


स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी स्वच्छता की कमी इस समस्या को बढ़ा देती है। यदि वहां पर खाना पकाने, परोसने या पीने के पानी की व्यवस्था में सफाई नहीं रखी गई है, तो वहां से भी संक्रमण फैल सकता है।


इस मौसम में पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर भी हो जाता है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। यही वजह है कि जुलाई से सितंबर के बीच टाइफाइड के मामले अचानक बढ़ जाते हैं।


बच्चों को टाइफाइड से कैसे बचाएं?


बच्चों को टाइफाइड से बचाने के लिए सबसे जरूरी है साफ पानी और स्वच्छ खाना। उन्हें हमेशा उबला हुआ या अच्छी तरह से फिल्टर किया गया पानी ही पिलाएं।


हाथ धोने की आदत डलवाना बेहद जरूरी है, खासकर शौच के बाद और खाना खाने से पहले।


बच्चों को खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से दूर रखें और घर के बने साफ-सुथरे खाने को प्राथमिकता दें।


बच्चों के बर्तन, टिफिन बॉक्स और पानी की बोतलों को नियमित रूप से अच्छी तरह साफ करते रहें ताकि बैक्टीरिया न पनप सके।


इसके अलावा, बच्चों को सफाई के महत्व के बारे में सिखाना और उन्हें स्वच्छ रहने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है।


क्या टाइफाइड से बचाव के लिए वैक्सीन है?


भारत में टाइफाइड के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं और इन्हें समय पर लगवाना बहुत जरूरी है। Typhoid Conjugate Vaccine (TCV) दो साल की उम्र में दी जाती है और यह तीन साल तक सुरक्षा देती है।


इसके अलावा Vi polysaccharide नामक पुराने वैक्सीन भी हैं, लेकिन TCV को अधिक प्रभावी माना जाता है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, TCV की एक खुराक बच्चों को 80 से 90 प्रतिशत तक सुरक्षा दे सकती है।


यदि किसी बच्चे को समय रहते वैक्सीन नहीं दी जाती या वह संक्रमित वातावरण में रहता है, तो उसके टाइफाइड से ग्रसित होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। 


इसलिए माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे को समय पर वैक्सीन दी गई हो और वह साफ-सुथरे माहौल में रह रहा हो।


टाइफाइड के लक्षण और जांच


टाइफाइड के प्रमुख लक्षणों में लगातार तेज बुखार, थकावट, पेट दर्द, सिरदर्द, दस्त या कब्ज, भूख में कमी और जीभ पर सफेद परत शामिल हैं।


कई बार बच्चों को हल्का गुलाबी रैश भी हो सकता है और मुंह सूखने की शिकायत होती है। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और जांच करानी चाहिए।


टाइफाइड की पुष्टि के लिए Widal टेस्ट, Typhi Dot टेस्ट और ब्लड कल्चर जैसी जांचें की जाती हैं।


यदि समय पर जांच नहीं कराई गई और इलाज में देरी हुई, तो यह बीमारी आंतों को नुकसान पहुंचा सकती है और आंत फटने की स्थिति तक पहुंच सकती है जो जानलेवा हो सकता है।


इलाज में आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं और एक पूरा कोर्स चलाया जाता है जिसे कभी भी बीच में नहीं छोड़ना चाहिए।


डॉक्टर की सलाह पर पूरा कोर्स पूरा करना बेहद जरूरी होता है ताकि बैक्टीरिया पूरी तरह समाप्त हो सके और बीमारी दोबारा न हो।


सही जानकारी और सतर्कता है सबसे बड़ा हथियार


टाइफाइड एक गंभीर बीमारी है लेकिन यह पूरी तरह रोकी जा सकती है। इसके लिए माता-पिता को बच्चों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना होगा।


समय पर वैक्सीन, सुरक्षित पानी और खाना, और बीमारी के लक्षणों को पहचानने की समझ, यही सब टाइफाइड से बच्चों को बचाने में मददगार सिद्ध होंगे।


यदि हम थोड़ी सी सतर्कता और जागरूकता अपनाएं, तो इस बीमारी को बहुत हद तक रोका जा सकता है।


आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।


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