डीजल गाड़ियों में यूरिया क्यों डाला जाता है? जानिए इसकी असली वजह!
डीजल गाड़ियों में यूरिया क्यों डाला जाता है? जानिए AdBlue नाम के इस घोल का क्या काम है, कैसे करता है प्रदूषण कम और क्या इससे खर्च बढ़ता है? पूरी आसान भाषा में जानकारी पढ़िए यहां।
डीजल गाड़ियों में यूरिया क्यों डाला जाता है? जानिए इसकी असली वजह!
  • Category: सामान्य ज्ञान


अगर आपने कभी डीजल कार सर्विस कराई हो या किसी ट्रक ड्राइवर से बात की हो, तो शायद “यूरिया डालना है” जैसी बात जरूर सुनी होगी।


पहली बार सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है क्योंकि दिमाग में तो सीधा वही यूरिया आता है जो खेतों में खाद के तौर पर डाला जाता है।


लेकिन हकीकत ये है कि गाड़ियों में डलने वाला यूरिया थोड़ा अलग होता है और इसका काम खेतों वाला नहीं, बल्कि धुएं वाला होता है।


गाड़ी में यूरिया क्यों डाला जाता है?


दरअसल, डीजल गाड़ियां जब चलती हैं तो उनसे जो धुआं निकलता है, उसमें कई हानिकारक गैसें होती हैं। इनमें सबसे खतरनाक होती है नाइट्रोजन ऑक्साइड यानी NOx गैस। ये गैस ना सिर्फ हवा को खराब करती है बल्कि इंसानों के लिए भी खतरनाक होती है।


सांस से जुड़ी दिक्कतें, आंखों में जलन और दूसरी बीमारियों की एक बड़ी वजह यही गैस होती है। इसी NOx को कम करने के लिए डीजल गाड़ियों में यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है।


BS6 नॉर्म्स के बाद बदला सिस्टम


जब भारत में BS6 यानी Bharat Stage 6 नियम लागू हुए, तब सरकार ने गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने की सख्त हिदायत दी। अब गाड़ियां ऐसे ही नहीं बनतीं, उनमें नए सिस्टम लगाए जाते हैं।


डीजल गाड़ियों में SCR नाम की एक तकनीक लगती है, जिसका मतलब होता है Selective Catalytic Reduction। इस सिस्टम में ही यूरिया घोल काम आता है। इसे AdBlue नाम से भी जाना जाता है।


कैसे काम करता है यूरिया घोल?


AdBlue यानी यूरिया घोल गाड़ी के एक खास टैंक में भरा जाता है। जब गाड़ी चलती है और एग्जॉस्ट से धुआं बाहर निकलता है, तो वह सीधा SCR सिस्टम से गुजरता है। वहीं पर ये यूरिया घोल यानी AdBlue धुएं में छिड़का जाता है।


इसके बाद एक केमिकल रिएक्शन होता है जिसमें यूरिया गर्मी से अमोनिया में बदल जाता है। यही अमोनिया NOx को तोड़ता है और उसे नाइट्रोजन और पानी में बदल देता है।


अब ये दोनों चीजें, नाइट्रोजन और भाप (पानी), हवा में कोई गंदगी नहीं फैलाते। मतलब गाड़ी का धुआं अब थोड़ा “क्लीन” हो जाता है।


क्या इससे खर्च बढ़ता है?


अब ये सवाल बहुत लोगों को आता है कि जब गाड़ी में फ्यूल के अलावा AdBlue भी भरवाना पड़े, तो खर्चा बढ़ जाएगा क्या? तो जवाब है, नहीं, ज़्यादा नहीं। ये घोल कोई बहुत महंगा नहीं होता।


आमतौर पर 1 लीटर AdBlue की कीमत 50-70 रुपये के आसपास होती है और एक बार में 10-20 लीटर डलता है, वो भी कई हजार किलोमीटर चलने के बाद। मतलब एक बार भरवाया और फिर 8-10 हज़ार किलोमीटर तक टेंशन खत्म।


वैसे भी इसकी खपत बहुत कम होती है। एक औसत डीजल कार में ये 1000 किलोमीटर में लगभग 1 लीटर से भी कम खर्च होता है।


कहां से भरवाएं और कब?


AdBlue पेट्रोल पंपों, गाड़ी के सर्विस सेंटरों या ऑटो पार्ट्स की दुकानों पर मिल जाता है। ज़्यादातर डीजल गाड़ियों के डैशबोर्ड पर एक इंडीकेटर होता है जो दिखाता है कि AdBlue कम हो गया है। तब आपको सिर्फ उसे भरवाने की जरूरत होती है।


अगर समय पर AdBlue नहीं डलवाया गया, तो गाड़ी में अलर्ट आने लगता है। कुछ गाड़ियों में तो ये भी होता है कि अगर टैंक पूरी तरह खाली हो गया, तो इंजन स्टार्ट ही नहीं होगा।


गाड़ी के लिए ज़रूरी, वातावरण के लिए भी


आज के वक्त में प्रदूषण बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है। ऐसे में अगर आपकी गाड़ी थोड़ी बहुत मदद कर रही है वातावरण को साफ रखने में, तो इसमें बुरा क्या है?


यूरिया यानी AdBlue से न तो गाड़ी की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है, न ही माइलेज पर। बस आपको इसे समय पर भरवाना होता है।


अगर आप भी डीजल गाड़ी चलाते हैं या खरीदने का सोच रहे हैं, तो SCR सिस्टम और AdBlue की अहमियत समझिए। ये कोई एक्स्ट्रा झंझट नहीं, बल्कि आपके और दूसरों की सेहत से जुड़ी एक ज़रूरी चीज़ है।


आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।


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