ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
देश की संसद का बजट सत्र इस बार लगातार हंगामे और सियासी टकराव के कारण चर्चा में बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का माहौल देखने को मिल रहा है। कई अहम मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने में लगा है, वहीं सरकार अपनी उपलब्धियों और नीतियों का बचाव कर रही है। इसी टकराव के बीच बुधवार को संसद में बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्धारित भाषण टालना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
पीएम मोदी का भाषण टलना बना बड़ा मुद्दा
बुधवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देने वाले थे। इसके लिए समय भी तय था और देशभर में लोगों की नजरें इस भाषण पर टिकी हुई थीं। लेकिन अचानक खबर आई कि पीएम मोदी लोकसभा में अपना जवाब नहीं देंगे और भाषण टाल दिया गया है।
इस फैसले के पीछे मुख्य वजह लोकसभा में विपक्ष का जबरदस्त हंगामा बताया जा रहा है। खासतौर पर विपक्ष की महिला सांसदों ने जोरदार प्रदर्शन किया। कई महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गईं और वहां नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। उनके हाथों में विरोध के पोस्टर और बैनर भी थे।
विपक्ष का ‘करो या मरो’ प्लान
सूत्रों के अनुसार विपक्ष ने पहले से ही रणनीति बना ली थी कि वे सरकार को संसद में घेरेंगे। बताया जा रहा है कि विपक्ष के सांसदों ने तय किया था कि वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। कई सांसद वेल में जाकर नारेबाजी करने की तैयारी में थे।
जानकारी के मुताबिक विपक्ष के केवल कुछ सांसद ही अपनी सीटों पर बैठे रहने वाले थे, जबकि बाकी सांसद वेल में जाकर प्रदर्शन करने की योजना बना चुके थे। इस वजह से संसद की कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी।
सरकार और विपक्ष के बीच समझौते की कोशिश नाकाम
बताया जा रहा है कि पर्दे के पीछे सरकार ने विपक्ष को शांत कराने की कोशिश भी की। गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं से बातचीत की। करीब तीन घंटे तक बातचीत चलती रही, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद हालात ऐसे बने कि प्रधानमंत्री का भाषण टालना पड़ा।
पीएम का भाषण टलने पर तेज हुई सियासत
प्रधानमंत्री का संबोधन टलने के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला तेज कर दिया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार महिला सांसदों से डर गई है।
वहीं सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जानबूझकर महिला सांसदों को आगे कर राजनीतिक माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।
संसद में दिखे तीन बड़े टकराव
बुधवार को संसद परिसर और सदन के अंदर कई विवाद और टकराव देखने को मिले।
पहला टकराव – ‘सरेंडर’ विवाद
विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के सामने झुक रही है। विपक्षी सांसदों ने सरकार से ट्रेड डील और विदेश नीति को लेकर सवाल पूछे और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की।
दूसरा टकराव – ‘गद्दार बनाम देश के दुश्मन’ विवाद
संसद परिसर में राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी बहस हो गई। राहुल गांधी ने बिट्टू पर तंज कसते हुए उन्हें ‘गद्दार’ कहा। इसके जवाब में बिट्टू ने राहुल गांधी को ‘देश का दुश्मन’ करार दे दिया। इस घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।
तीसरा टकराव – भारत-अमेरिका ट्रेड डील विवाद
भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर भी संसद में जमकर बहस हुई। विपक्ष ने सरकार से कई सवाल पूछे, जिनका जवाब सरकार की ओर से दिया गया, लेकिन विवाद थमता नजर नहीं आया।
राहुल गांधी का किताब वाला हमला
राहुल गांधी संसद में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब लेकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को इस किताब को पढ़ना चाहिए। हालांकि यह किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
बीजेपी का पलटवार
राहुल गांधी के बयान के जवाब में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार से जुड़ी किताबों का जिक्र किया। उन्होंने लोकसभा में कई विवादित किताबों का हवाला दिया। इस दौरान स्पीकर उन्हें कई बार टोकते रहे, लेकिन सदन में हंगामा जारी रहा।
निजी हमलों से और बढ़ा तनाव
संसद परिसर में नेताओं के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियां भी देखने को मिलीं। राहुल गांधी और रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई बहस के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाया। इससे राजनीतिक विवाद और गहरा गया।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर उठा विवाद
संसद में ट्रेड डील को लेकर भी तीखी बहस हुई। विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या भारत अमेरिकी उत्पादों पर जीरो टैरिफ देने जा रहा है। इसके अलावा कृषि और डेयरी क्षेत्र को लेकर भी चिंता जताई गई।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस समझौते में किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
राज्यसभा में भी जारी रह सकता है हंगामा
लोकसभा में हुए हंगामे का असर राज्यसभा में भी देखने को मिल सकता है। खबर है कि विपक्ष ने प्रधानमंत्री के राज्यसभा भाषण के दौरान भी विरोध करने की रणनीति बनाई है। इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन की बैठक भी होने वाली है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
आगे क्या होगा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। कई अहम मुद्दों पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही हंगामेदार रहने की संभावना है।
कुल मिलाकर, इस बार का बजट सत्र केवल आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मंच बनता नजर आ रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में संसद का माहौल किस दिशा में जाता है।
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