ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बड़ा और अहम घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में अज्ञात वीआईपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। दिल्ली स्थित सीबीआई की क्राइम ब्रांच शाखा में मामला दर्ज होने के बाद एजेंसी की विशेष जांच टीम देहरादून पहुंच चुकी है और जांच को आगे बढ़ा रही है। इस कदम को पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से इस वीआईपी की पहचान को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
2022 में हुई थी अंकिता की हत्या
यह मामला सितंबर 2022 का है, जब पौड़ी जिले की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। अंकिता ऋषिकेश स्थित वनांतरा रिसोर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। जांच में सामने आया था कि अंकिता पर एक कथित वीआईपी को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उन्होंने विरोध किया था।
इस मामले में रिसोर्ट के मालिक पुलकित आर्य समेत तीन लोगों को आरोपी बनाया गया था। लंबी सुनवाई के बाद 30 मई 2024 को जिला न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, उस समय वीआईपी की पहचान सामने नहीं आ सकी थी, जिससे लोगों में कई सवाल बने रहे।
वायरल ऑडियो के बाद फिर उठा मामला
हाल ही में यह मामला फिर सुर्खियों में तब आया, जब पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर से जुड़े कथित वायरल ऑडियो सामने आए। इन ऑडियो क्लिप्स के सामने आने के बाद प्रदेशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए और लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी।
अंकिता के माता-पिता भी लगातार इस मामले में न्याय की मांग करते रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर सीबीआई जांच कराने की अपील की थी। परिजनों का कहना था कि पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
सरकार ने दी CBI जांच की मंजूरी
अंकिता के परिवार की मांग और जनता के बढ़ते दबाव को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके बाद केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने पर यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। अब एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सरकार का कहना है कि वह इस मामले में पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ काम कर रही है। सरकार के मुताबिक सीबीआई जांच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।
विपक्ष और सरकार के बीच बयानबाजी
सीबीआई जांच की घोषणा के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि यह फैसला केवल जनता के आंदोलन को शांत करने के लिए लिया गया है। हालांकि, अब एफआईआर दर्ज होने और जांच शुरू होने के बाद सरकार का दावा है कि उसने विपक्ष के आरोपों का जवाब दे दिया है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल न्याय दिलाना है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पूरे प्रदेश की नजर जांच पर
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल अज्ञात वीआईपी की पहचान को लेकर है। पूरे उत्तराखंड समेत देशभर के लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर वह वीआईपी कौन था, जिसके कारण यह पूरा मामला सामने आया।
सीबीआई जांच से उम्मीद जताई जा रही है कि इस हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं का खुलासा होगा और अंकिता भंडारी को न्याय मिलेगा। आने वाले समय में जांच की दिशा और उसके नतीजे इस मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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