ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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लोकसभा में इन दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक अप्रकाशित आत्मकथा पर आधारित लेख का हवाला देते हुए सरकार से जवाब मांगा है। राहुल गांधी का कहना है कि लेख में चीन और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मामलों का जिक्र किया गया है, जो देश की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है। इसी मुद्दे को लेकर पिछले दो दिनों से संसद में लगातार हंगामा हो रहा है।
मंगलवार को जब राहुल गांधी ने चीन के साथ सैन्य टकराव का मुद्दा फिर से उठाने की कोशिश की, तो सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कार्यवाही बाधित हो गई। राहुल गांधी ने मांग की कि जनरल नरवणे की किताब पर आधारित लेख की सत्यता की जांच होनी चाहिए और इस पर संसद में विस्तार से चर्चा की जानी चाहिए।
पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद का बयान
इस विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद का बयान भी चर्चा में आ गया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जनरल नरवणे को सलाह देते हुए कहा कि सेना में रहते हुए जो संवेदनशील जानकारियां मिलती हैं, उन्हें सार्वजनिक करने में सावधानी बरतनी चाहिए।
वैद का मानना है कि कई बार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे तथ्य होते हैं, जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इससे सरकार और देश की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हर पूर्व अधिकारी संवेदनशील जानकारियां सार्वजनिक करने लगे, तो इससे देश की सुरक्षा नीति पर असर पड़ सकता है।
सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस
राहुल गांधी ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह केवल एक किताब या लेख का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। उन्होंने इसे राष्ट्रपति के अभिभाषण से भी जोड़ा और सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
हालांकि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदन के आसन की ओर से पहले ही इस विषय पर व्यवस्था दी जा चुकी है और उसी मुद्दे को दोबारा उठाना संसदीय नियमों के खिलाफ है। इस पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में सदन को गुमराह कर रही है।
खरगे का सरकार पर हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जनरल नरवणे की किताब में ऐसा क्या लिखा है, जिससे सरकार और भाजपा नेता परेशान नजर आ रहे हैं।
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर खुली चर्चा से बच रही है। उन्होंने 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष का भी जिक्र किया, जिसमें भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। खरगे ने कहा कि उस घटना के बाद भी सरकार ने चीन के खिलाफ सख्त रुख नहीं अपनाया, जो देश की सुरक्षा के लिए चिंताजनक है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकता है विवाद
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील बन चुका है। विपक्ष जहां इस मामले में पारदर्शिता और चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं सरकार संसदीय नियमों और राष्ट्रीय हित का हवाला देकर इस पर सीमित प्रतिक्रिया दे रही है।
ऐसे में संभावना है कि आने वाले दिनों में संसद के अंदर और बाहर यह विवाद और तेज हो सकता है। देश की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनती है या नहीं, यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा।
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